गोहत्या और मांस निर्यात के दोषी !!

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Published On : 2017-04-05 23:13:37

गोहत्या और मांस निर्यात के दोषी

गोविभा के संपादक श्री नरेंद्र दुबे ने यह आलेख ‘गोरक्षा सत्याग्रह: पच्चीस वर्ष’ में लिखा था। इसका प्रकाशन 5 जून 2001 को शांतिसेवक के विषेषांक के रूप में हुआ था। आज यह आलेख अचानक से प्रासंगिक हो गया है। इसलिए यहां उसे ज्यों का त्यों दिया जा रहा है। 

कृषि प्रधान भारत में किसी भी उम्र के गाय-बैल का कत्ल केंद्रीय कानून से बंद किया जाए और मांस निर्यात बंद किया जाए। इस मांग को लेकर विनोबा जी ने 11 जनवरी 1982 से देवनार मुम्बई में गोरक्षा सत्याग्रह प्रारंभ किया। भारत भर में गोहत्याबंदी की मांग को लेकर जब वे आमरण अनशन कर रहे थे तब भारत सरकार ने संसद में वचन दिया था कि संविधान में संशोधन करके इस विषय को समवर्ती सूची में ले लिया जाएगा और गोहत्याबंदी का केंद्रीय कानून बना दिया जाएगा। इस अभिवचन के कारण ही विनोबा जी ने पांच दिन बाद अनशन छोड़ा था। लेकिन भारत सरकार ने वचन तोड़ा इसलिए विनोबा जी ने देवनार में सत्याग्रह शुरू किया। मुम्बई में सत्याग्रह का संयोजन विनोबा जी के आश्रम के अंतेवासी स्व.श्री अच्युत भाई देशपांडे आजीवन करते रहे। उनके निर्वाण के पष्चात् आज भी वहां गोरक्षा सत्याग्रह जारी है।

विनोबा जी के निर्वाण के मात्र सोलह दिन पहले 30 अक्टूबर 1982 को श्री अटलबिहारी वाजपेयी, राजमाता श्रीमती विजयाराजे सिंधिया के साथ विनोबा जी से पवनार आश्रम में मिलने आए थे। उस समय उनके बीच जो वार्तालाप हुआ, वह यहां प्रस्तुत है:

विनोबा जी: भारत में और दुनियाभर में भी किसी भी उम्र के गाय, बैल और बछड़े का कतल न हो इसके लिए प्रयत्न किया जाए।

वाजपेयी जी: अभी तो भारत में भी गाय कट रही है। कुछ लोग कहते हैं कि हम इंसान को नहीं बचा सकते हैं तो गाय को कैसे बचा सकते हैं ?

विनोबा जी: गाय इनसान से बड़ी है। मां बहुत हुआ तो दस महीने दूध पिलाती है। उसके बाद का काम कौन करेगा, आप करेंगे ?

वाजपेयी जी: अब आंदोलन का सरकार पर कोई असर नहीं होता।

विनोबा जी: असर हो इसके लिए क्या उपाय किया जाए ?

वाजपेयी जी: यह आप ही बताइए। इसीलिए मैं आया हूं।

विनोबा जी: इंदिरा जी को ‘राजी’ करना चाहिए। इंदिरा जी इसमें से ‘इंदि’ निकालो। ‘राजी’ करो।

वाजपेयी जी: ‘आप उन्हें राजी करें’ यह कहने के लिए और ‘हम उन्हें राजी कर सकें’ इसकी शक्ति हमें मिले इसके लिए हमें आपका आशीर्वाद मिले इसलिए हम आए हैं।

विनोबा जी: आप ‘वाजपेयी’ हैं न ?  ‘वा’ निकाल दीजिए। ‘जप’ करें। ‘जपे, जपे’।

वाजपेयी जी: भारतीय जनसंघ ने गोवंश की हत्या पर पूर्ण नियंत्रण करने के लिए आंदोलन किया था। तब हम उसमें शरीक हुए थे। लेकिन फिर लोकशाही का प्रश्न आगे आया और जनसंघ जनता पार्टी में विलीन हुआ तो गाय का प्रश्न पीछे पड़ गया। लोकषाही का प्रष्न आगे आया। अब दिसम्बर में भोपाल में अधिवेशन होगा। उसमें यह प्रश्न लेंगे। कठिनाई यह है कि गोरक्षा के पक्ष के लोग बंटे हुए हैं। मिलकर कभी आंदोलन नहीं चलता।

विनोबा जी: भोपाल में तय करेंगे, ठीक है।

विजयाराजे: देश में गोहत्याबंदी के पक्ष में कुछ मुस्लिम लोग हैं। ऐेसे अनुकूल मुस्लिमों का एक संगठन बने और वह संगठन देश में मुस्लिम जनमत खड़ा करे ताकि सरकार को यह बहाना नहीं मिलेगा कि मुस्लिम गोहत्याबंदी के पक्ष में नहीं हैं।

विनोबा जी: ठीक बात कहती हैं।

वाजपेयी जी: बंबई कार्पोरेशन में एक मुस्लिम सदस्य ने कहा कि 7 बकरे को काटने से जो पुण्य मिलता है वह एक गाय को काटने से मिलता है। क्या यह बात कुरआन में है ?

विनोबा जी: कुरआन में यह बात नहीं है। बल्कि मुहम्मदसाहब ने कहा है, गाय का गोश्त बीमारी पैदा करता है और गाय का दूध दवा है। बाबा ने कुरआन शरीफ के सब सूरों के नाम बताए और कुरआन-सार दिखाया। उसमें ‘मनुष्य का अन्न क्या है’ यह हिस्सा दिखाया।

वाजपेयी जी: अब तो बड़े पैमाने पर गोमांस निर्यात हो रहा है। सरकार ही उसे बंद कर सकती है। विदेशी मुद्रा के लोभ में यह हो रहा है। इसके लिए बैल भी कट रहे हैं।

विनोबा जी: इसीलिए बंबई में सत्याग्रह चल रहा है।

विजयाराजे: यदि इंदिराजी सारे भारत भर में गोवंश हत्याबंदी कानून बनाएगी, तो बड़े पुण्य की भागी होंगी ओर देश की सभी समस्याओं का हल निकाल सकेंगी। यह करने के लिए नैतिक साहस उनमें आएगा।

विनोबा जी: इंदिराजी से मिलकर आप लोग बातें करिए। उनकी अड़चनें क्या हैं, यह वे आपको बतायेंगी। इंदिराजी बाबा के पास आयी थीं। तब बाबा ने उन्हें सलाह दी थी कि रात को सोते समय ‘राम हरि’, ‘राम हरि’ का जप करो। इंदिराजी ने कबूल किया था कि वे ‘राम हरि’ का जप करेंगी।

विजयाराजे: बहुत अच्छी सलाह आपने उन्हें दी। फिर हमें आशा है।

विनोबा जी: हमेशा आशा रखें। निराश कभी नहीं होना चाहिए।

शांतिस्वरूप जी: आप अटलबिहारी वाजपेयी को और राजमाताजी को संपूर्ण गोवंश रक्षा के लिए हृदयपूर्वक आशीर्वाद दें, यही हमारी प्रार्थना है।

विनोबा जी: ठीक है। आशीर्वाद है। आप लोग बंबई जाइए, अपने खर्चे से जाएं और वहां अच्युतभाई को मदद करिए।

वाजपेयी जी: संसद सदस्य के नाते सरकार ने मुझे पास दे रखा है, इसलिए खर्चा नहीं लगता।

विनोबा जी: ठीक है।

(मैत्री से साभार)

इस चर्चा के बाद अटलजी बंबई आए थे। गोरक्षा सत्याग्रह के संचालक श्री अच्युतभाई उनसे मिले और देवनार सत्याग्रह में सम्मिलित होने का निवेदन किया। वे उस समय भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। तब उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे पार्टी के अध्यक्ष हैं और जब तक पार्टी अनुमति नहीं देती वे सत्याग्रह में सम्मिलित नहीं हो सकते।

अब अटलजी प्रधानमंत्री हैं। लेकिन गोहत्याबंदी का केंद्रीय कानून बनाना तो दूर की बात लेकिन मांस निर्यात जो उनकी सरकार बिना कोई कानून बनाए भी बंद कर सकती है वह भी नहीं कर रही है। ऐसा क्यों है ? यह गंभीर चिंतन का विषय है।

लोकसभा में गोरखपुर के भाजपा सांसद श्री आदित्यनाथ ने गोहत्याबंदी कानून बनाने के संबंध में संसद के विचारार्थ एक प्रस्ताव रखा, जिसे विचार के लिए तो स्वीकार कर लिया गया, लेकिन इस संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने भाजपा सांसदों की बैठक में कहा कि “भाजपा सांसदों को बिना हाईकमान की अनुमति के कोई गैर सरकारी प्रस्ताव नहीं रखना चाहिए।” इससे यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की पहली प्राथमिकता न गाय-बैल हैं और न ही देश के गरीब लोग। उनकी पहली प्राथमिकता तो अपनी सत्ता बचाने की और किसी भी तरह से उसे चलाने की ही है।

यह कहा जा रहा है कि जब तक भारतीय जनता पार्टी को अकेले दो तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा, तब तक वह गोहत्याबंदी नहीं कर सकेगी। इसलिए जो लोग देश में संपूर्ण गोहत्याबंदी चाहते हैं वे भाजपा को दो तिहाई बहुमत दिलाने का प्रयत्न करें। इसका अर्थ यह हुआ कि भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिलने तक देश में गोहत्या चलती रहेगी। इसके विपरीत गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबू भाई पटेल का उदाहरण है। वे जब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने गुजरात में संपूर्ण गोहत्याबंदी कानून बनाने का प्रयत्न किया लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के सन् 1958 के निर्णय के कारण नहीं बना सके। जब वे मुख्यमंत्री नहीं रहे तब देवनार सत्याग्रह में भाग लिया और अपनी गिरफ्तारी दी। बाद में उन्हीं के प्रयास से स्व.चिमनभाई पटेल ने गुजरात में संपूर्ण गोहत्याबंदी कानून बनाया, जिसे गुजरात उच्च न्यायालय ने संविधानसम्मत न मानकर रद्द कर दिया।

सारे देश को यह समझ लेना चाहिए कि गोरक्षा का प्रश्न दलीय राजनीति से या सत्ता की राजनीति से हल नहीं होगा। यह प्रश्न संप्रदायवाद से भी हल नहीं होगा। यद्यपि गोसेवा में निष्ठावान हिंदू गोभक्तों ने महान योगदान दिया है, किंतु गोहत्या के लिए संप्रदायवादी हिंदू ही ज्यादा जिम्मेदार हैं, क्योंकि गोहत्याबंदी आंदोलन को मुसलमानों के प्रति घृणा और द्वेष भड़काने का आंदोलन बनाते हैं और उसकी प्रतिक्रिया में मुस्लिम मानस ज्यादा से ज्यादा गो-विरोधी और हिंदू विरोधी बन जाता है।

विनोबाजी ने जो गोरक्षा सत्याग्रह शुरू किया है उसका आधार ही सत्य, प्रेम और करुणा है। जैसे गांधीजी चरखे को अहिंसा का प्रतीक मानते थे और ‘सूत्र यज्ञ’ में सबको सम्मिलित करते थे वैसे ही विनोबाजी गाय को प्रेम और करुणा का प्रतीक मानते हैं और मुसलमान, ईसाई आदि सभी को गोरक्षा के महान यज्ञ में सम्मिलित करना चाहते थे। भारत में गोरक्षा भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, जो हिंदू, मुस्लिम, ईसाई आदि सभी की समन्वित साझा संस्कृति है। भारतीय इतिहास इस बात का साक्षी है कि यहां मुगल बादशाहों ने कानून बनाकर गोहत्याबंदी की थी। यदि भारत में सभी समुदाय के लोग मिलकर प्रेम से गोरक्षा करें और सभी राजनीतिक दल मिलर गोहत्याबंदी कानून बनाएं तो सारे विश्व पर उसका वैसा ही जबर्दस्त असर होगा जैसा भारत की आजादी का हुआ था। जब कांग्रेस और भाजपा मिलकर कई सारे विधेयक पास कर सकते हैं तो गोहत्याबंदी विधेयक क्यों नहीं ?

विज्ञान और टेक्नालाजी के संदर्भ को ध्यान में रखकर और देश की विकट आर्थिक स्थिति को देखकर ही हम यह मांग कर रहे हैं। गोहत्याबंदी से ही अपना देश आर्थिक गुलामी से बच सकता है। भारत में गोरक्षा से ही अहिंसक आर्थिक क्रांति हो सकती है। इसी से जैविक खाद, दूध उर्जा, जलावन गैस, परिवहन, बेरोजगारी जैसे कठिन प्रष्न हल हो सकते हैं और हिंसा केा मिटाया जा सकता है।