Bio Gass

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Published On : 2017-06-11 20:12:08

बायो गैस सयंत्र का घर-घर निर्माण करें

शंकरराव महाले

(1) बायो गैस सयंत्र क्या है ?

बायो गैस सयंत्र ईंट, सीमेंट, रेत, गिट्टी की सहायता से जमीन के अन्दर 6 से 8 फीट की गहराई में एक डायजेस्टर का निर्माण किया जाता है। बोलचाल की भाषा में इसे गोबर गैस भी कहा जाता है। इस संयंत्र से हमें मिथेन गैस की प्राप्ति होती है, जो गोबर, गोमूत्र, मानव मल, मूत्र एवं अन्य कार्बनिक पदार्थों से तैयार होती है।

(2) गोबर गैस सयंत्र क्या ?

भारतीय अर्थ व्यवस्था में कृषि और गोपालन का महत्वपूर्ण स्थान है। महात्मा गाँधी ने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ‘‘यदि हम पशुधन का ठीक से उपयोग न कर सके तो भारत का विनाश हो जाएगा’’, पश्‍चिमी देशों में जैसा पशुधन बोझ है। वैसे ही यहाँ हो जाएगा और उसे मार डालने के अतिरिक्त कोई चारा नहीं रहेगा।

यह दृश्य हमें आज दिखाई दे रहा है, रासायनिक खाद, निंदा नाशक केमिकल्स एवं कीटनाशकों के अंधाधुँध उपयोग से हमारी खेती बर्बादी के कगार पर पहुँच गई है। आर्थिक दृष्टि से किसान परेशान है। खेती की लागत बढ़ गई हैऔर उत्पादन दिनोदिन कम होता जा रहा है। परिस्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि किसानों को आत्महत्या के लिए प्रेरित होना पड़ रहा है। हजारों हजार किसान आत्महत्या कर रहे हैं। क्या यह विषय शोचनीय नहीं है?

जिस देश में रोज लाखों की संख्या में पशुओं का वध हो, हमारी शस्य श्यामला धरती रासायनिक खाद कीटनाशक आदि रसायनों के प्रभाव से विषाक्त हो, जिसका प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा हो, कत्लखानों के लिए सरकारी संरक्षण हो, जन भावना की कोई कद्र न हो, भूमि में जहर छोड़ा जा रहा हो हमारी मूल परम्परा एवं संस्कृति पर कुठाराघात हो तो भारतवासियों को जाग्रत करने का प्रयत्न करना चाहिए। गौमाता को कत्लखानों से मुक्त करें, अपनी संस्कृति और परम्परा को पहचानें, गौमाता गोबर देती है, जिसमें लक्ष्मी का वास है गोबर से अपनी खेती के लिए उत्तम खाद बनाएं। पशुधन को बचाएं और खेती को विषाक्त न होने दें।  घर-घर बायो गैस सयंत्र (गोबर गैस) का निर्माण करना, यह आज का स्वधर्म है।

(3) बायो गैस सयंत्र निर्माण हेतु स्थल का चुनाव

बायो गैस सयंत्र निर्माण हेतु योग्य स्थल का चुनाव सर्वप्रथम आवश्यक है, जहाँ अधिक समय तक धूप रहती हो, ऊँचा स्थान हो, पशुओं के कोठे से नजदीक हो, रसोई घर से उसकी दूरी 20 से 25 मीटर तक हो, यदि संयंत्र निर्माण स्थल पर कुआँ हो तो उसकी दूरी 20 से 25 मीटर हो।

सयंत्र निर्माण हेतु आवश्यकता

बायो गैस संयंत्र निर्माण में आवश्यक मात्रा में पशुधन होना आवश्यक है। पारिवारिक गैस संयंत्र हेतु आवश्यक पशुओं की संख्या गोबर की मात्रा एवं कितने लोगों के लिए खाना बन सकता है, उसका विवरण नीचे लिखी तालिका में दर्शाया गया है ˆ

तालिका क्र. (1)

क्र.    संयंत्र आवश्यक     ताजे गोबर    कितने लोगों के

      क्षमता पशुओं की      की मात्रा     लिए खाना बनेगा

      घ.मी.  संख्या

1.    1     2/3   25 किलो     3 से 4

2.    2     4/6   50 किलो     4 से 6

3.    3     7/9   75 किलो     8 से 12

4.    4     10/12 100 किलो    12 से 16

बायो गैसे सयंत्र निर्माण लागत एवं मॉडल

बायो गैस संयंत्र की लागत उसके मॉडल एवं साईज के अनुसार कम ज्यादा होती है, अनुमानित लागत ˆ

2 घ.मी. संयंत्र में     16 से 17 हजार

3 घ.मी. संयंत्र में     18 से 20 हजार

4 घ.मी. संयंत्र में     20 से 24 हजार रु. तक लागत आ सकती है। 

तीन तरह के मॉडल वर्तमान में प्रचलित हैˆ

(1) के.वी.आई.सी. मॉडल ः इस संयंत्र में सभी संयंत्रों से लागत अधिक आती है। क्योंकि इस संयंत्र के मुँह पर गैस संग्रहक टंकी लोहे की चादर की बनी होती है। इसकी लागत 30 से 35 हजार तक हो सकती है।

(2) जनता मॉडल : यह रेत, ईंट, सीमेंट, गिट्टी की सहायता से तैयार होता है। जमीन के अन्दर 7 से 8 फीट (साईज के अनुसार) गहराई से इसका निर्माण किया जाता है। इसकी लागत 17 से 24 हजार तक इसके साईज के अनुसार आती है।

(3) दीनबँधु : यह सयंत्र जमीन के अन्दर 6 फीट की गहराई पर बनाया जाता है। इसकी लागत दोनों मॉडलों से भी कम आती है, यह रेत, ईट, सीमेंट, गिट्टी की सहायता से बनाया जाता है।

गैस उत्पादन एवं गैस खपत : गैस उत्पादन

1 किलो ताजे गोबर से 1.30 घ.फीट गैस बनेगी

प्रति व्यक्ति मानव मल से 1 घ.फीट गैस बनेगी

गैस खपत

प्रति व्यक्ति दोनों समय भोजन बनाने हेतु 8 घ.फीट गैस की आवश्यकता होगी।  यदि घर में 5 व्यक्ति हैं तो 40 घ.फीट गैस लगेगी, जो 35 से 40 किलो गोबर से प्राप्त होगी। यदि सयंत्र के साथ शौचालय जोड़े तो प्रति व्यक्ति 1 घ.फीट गैस अतिरिक्त मिलेगी।

प्रकाश व्यवस्था हेतु

4.50 घ.फीट गैस प्रति घंटा, प्रति लेम्प लगेगी, जो 5 से 6 किलो गोबर से प्राप्त होगी।

गैस इंजिन चलाने हेतु इंजिन चलाने हेतु बड़े आकार के सयंत्र का निर्माण करना होगा.